डायपर से होने वाले रैशेज ले सकते हैं ख़तरनाक इनफेक्शन का रूप

Written by Pooja Sharma

@Health Expert

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नवजात शिशु की तव्चा बहुत मुलायम होती है जिसके कारण इनफेक्शन आसानी से फैलने लगता है। डायपर पहनने के कारण बच्चों को रैशेज हो जाते हैं। बच्चों को डायपर रैश कभी भी हो सकते हैं खासकर 4 से 15 महीने के बच्चों में बहुत आम बात है। इसके अलावा 4 महीने से कम उम्र में भी रैशेज होने की संभावना बहुत ज़्यादा होती है। डायपर रैश एक तरह की त्वचा की जलन होती है जो बैक्टीरियल या फंगल इन्फेक्शन के वजह से होते हैं। अब इन बैक्टीरियल और फंगस इन्फेक्शन के कई कारण हो सकते हैं।

रैशेज होने के कारण

बात जब बच्चों की हेल्थ की आती है तो हम अधिक सावधानी बरततें हैं। लेकिन कभी-कभी हम अपने कामों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने बच्चों के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। रैशेज होने के कई कारण हो सकते हैं पर हम आपको इसके कुछ मुख्य बताने जी रहे हैं।

  • गीलापन

  • चाहे आप कितना भी गीलापन सोखने वाले डायपर बच्चे को पहनाती हों लेकिन फिर भी डायपर के आसपास गीलापन रह ही जाता हैं और ये डायपर रैश का सबसे बड़ा कारण है।

  • रासायनिक संवेदनशीलता

  • बार-बार बच्चों की त्वचा का उसके डायपर से रगड़ खाने कारण भी आपके बच्चे को डायपर रैश हो जाता है। इसीलिए टाइट डायपर या ऐसे कपडे के इस्तेमाल से बचें जो बच्चे की त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं।

  •  नयी खाने की चीजें

  • जैसे-जैसे बच्चे सॉलिड फ़ूड खाने लगते हैं वैसे-वैसे उसके पॉटी में भी बदलाव आते हैं। ये बदलाव पॉटी की फ्रीक्वेंसी पर भी असर डालते हैं। लेकिन अगर आप अब भी बच्चे को स्तनपान करवा रही हैं तो बच्चे में रैश का कारण आपके द्वारा खायी गयी चीजें भी हो सकती हैं।

  • एंटीबायोटिक्स

  • बच्चों को एंटीबायोटिक्स देने से भी उनमे रेशेस की समस्या उत्पन्न होती है . इससे डायरिया और दुसरे यीस्ट इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है . ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि एंटीबायोटिक्स लेने से उन बैक्टीरिया का खात्मा हो जाता है जो यीस्ट की मात्रा पर नियंत्रण रखते हैं।

  •  संवेदनशील त्वचा

  • जिन बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है उनके डायपर रैश होने की संभावना भी ज्यादा होती है . इसके अलावा अगर इन्हें एक्जिमा या अटोपिक डर्मेटाइटिस है तो उनमे डायपर रैश होने की संभावना और ज्यादा बढ़ जाती है।

    कैसे करें डायपर रैश की पहचान?

    अगर आपको नहीं पता रैशेज कैसे दिखते है तो नीचे आपको इसके कुछ संकेत बताए जा रहे हैं।

    • रैशेज लाल रंग के होते हैं और इनका आकार बढ़ता चला जाता है।
    • लड़कों में लिंग और लड़कियों में वेजाइना का रंग लाल हो जाता है।
    • अलसर, ब्लिस्टर, पिंपल, बंप, या पस से भरी फुन्सिओं का होना भी एक संकेत है।
    • पेशाब करते समय बच्चों को जलन या दर्द का अनुभव होना।

    आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए ?

      अगर आप अपने बच्चे के शरीर पर ध्यान रखें तो आप रैशेज को आसानी से देख पाएंगी और अगर आप इसे जल्दी ही पहचान पाने में कामयाब हो जाती हैं। इसका उपचार आप घर पर भी कर सकते हैं। लेकिन अगर बच्चों में ये लक्षण दिखें तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

    • अगर रैश के आस पास कोई पिंपल या ब्लिस्टर है।
    • अगर आपके बच्चे को अधिक समय तक बुखार है।
    • अगर बच्चे का वजन अचानक से घटने लगे तो शायद रैशेज से होने वाला दर्द है।
    • बच्चों में रैशेज उसकी बाँहों या पैर तक फैलने लगा है तो इन्फैक्शन बन सकता है।
    • अगर बच्चे के हफ्ते के भीतर ठीक नहीं होते तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

    आप रैशेस को ठीक करने के लिए डॉक्टर के पास भी जा सकते हैं लेकिन घरेलू उपायों से भी डायपर रैश का इलाज किया जा सकता है। इस लेख में हमने आपको रैशेस के कारण और लक्षण बताएं है ताकि आप अपने बच्चे की सेहत को लेकर सतर्क रह सकें।
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